| खीर | |
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मेवों और केसर से सजी खीर | |
| उद्भव | |
| वैकल्पिक नाम | पायस, पायसम, पायेश |
| संबंधित देश | भारत |
| देश का क्षेत्र | दक्षिण एशिया |
| व्यंजन का ब्यौरा | |
| भोजन | मिष्टान्न |
| परोसने का तापमान | गरम या ठंडा |
| मुख्य सामग्री | चावल, दूध, चीनी, गुड़, इलायची |
| अन्य प्रकार | फिरनी, पायसम, दूधपाक, सेवईं की खीर |
खीर भारत और दक्षिण एशिया में लोकप्रिय एक पारंपरिक मिष्टान्न है, जिसे सामान्यतः दूध और चावल को धीमी आँच पर पकाकर बनाया जाता है। इसमें स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए चीनी, गुड़, इलायची, केसर, बादाम, पिस्ता और अन्य मेवे मिलाए जाते हैं।[1]
भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों में खीर के अनेक रूप प्रचलित हैं। इसे अलग-अलग स्थानों पर पायस, पायसम, पायेश और फिरनी जैसे नामों से जाना जाता है।[2] यह धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में विशेष रूप से बनाई जाती है।
इतिहास
[संपादित करें]खीर का इतिहास प्राचीन भारतीय सभ्यता से जुड़ा माना जाता है। संस्कृत में "क्षीर" शब्द का अर्थ दूध होता है, जिससे "खीर" शब्द विकसित हुआ माना जाता है।[3]
प्राचीन भारतीय ग्रंथों और धार्मिक परंपराओं में दूध और चावल से बने मीठे व्यंजनों का उल्लेख मिलता है। समय के साथ विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय सामग्री और स्वाद के अनुसार इसके अलग-अलग रूप विकसित हुए। मध्यकाल में मेवों, केसर और सूखे फलों के उपयोग से इसकी समृद्ध शैली लोकप्रिय हुई।[4]
बनाने की विधि
[संपादित करें]खीर बनाने के लिए सामान्यतः चावल को धोकर दूध में धीमी आँच पर पकाया जाता है। जब चावल मुलायम हो जाते हैं, तब उसमें चीनी या गुड़ मिलाया जाता है। इसके बाद इलायची, केसर तथा विभिन्न मेवे डालकर स्वाद बढ़ाया जाता है। कुछ प्रकारों में सेवईं, साबूदाना, मखाना या दालों का भी उपयोग किया जाता है।[5]
क्षेत्रीय प्रकार
[संपादित करें]भारत और दक्षिण एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में खीर के अनेक प्रकार प्रचलित हैं:
धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
[संपादित करें]खीर को भारतीय धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व प्राप्त है। इसे कई मंदिरों और पूजा-अर्चना में प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। जन्माष्टमी, नवरात्रि, दीपावली और अन्य त्योहारों में इसे विशेष रूप से बनाया जाता है।[6]
दक्षिण भारत में पायसम को विवाह और धार्मिक भोजों का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, जबकि उत्तर भारत में त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर खीर बनाना एक सामान्य परंपरा है।
पोषण
[संपादित करें]खीर में मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा पाए जाते हैं। दूध और मेवों के कारण इसमें कैल्शियम तथा ऊर्जा की मात्रा भी अधिक होती है। हालांकि अत्यधिक चीनी के कारण इसे सीमित मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है।
विश्व के समान व्यंजन
[संपादित करें]दुनिया के विभिन्न देशों में खीर जैसे कई व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें
Rice pudding,
फ्रांस का Riz au lait,
स्पेन का Arroz con leche
तुर्की का Sütlaç
यह भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Davidson, Alan (2014). The Oxford Companion to Food. Oxford University Press. ISBN 9780199677337.
- ↑ "History of Kheer". NDTV Food. अभिगमन तिथि: 15 जून 2026.
- ↑ Monier-Williams Sanskrit Dictionary. Oxford University Press. 1899.
- ↑ Achaya, K. T. (1994). Indian Food: A Historical Companion. Oxford University Press. ISBN 9780195628456.
- ↑ "Traditional Indian Rice Pudding". BBC Good Food. अभिगमन तिथि: 15 जून 2026.
- ↑ "Importance of Kheer in Indian Festivals". The Hindu. अभिगमन तिथि: 15 जून 2026.